कुंज महल रंग हो हो होरी
Varshotsava — श्री वंशी अलि
Verse 2 of 3
(राग गौरी)
कुंज महल रंग हो हो होरी,
खेलत नवल किशोर किशोरी।
बाजत ताल मृदंग झांझ ढप
अबीरगुलाल उडावत झोरी॥ [1]
नाचत सखी जन झमक मिल मिल
गावति गारि लाल सों जोरी।
हंसत हंसावति निज स्वामिन कों,
श्री ललित सखी जैश्री बंशी अलि मोरी॥ [2]
- श्री वंशी अली जी, वर्षोत्सव, बसंत के पद (15)
(राग गौरी) कुंज महल रंग हो होरी, खेलत नवल किशोर किशोरी। बाजत ताल मृदंग झांझ ढप अबीरगुलाल उदावत झोरी.. [1] नाचत सखी जन झमक मिल मिल गावती गारी लाल सोन झोरी। कौन हैं हंसत हंसवती की अपनी पत्नी श्री ललित सखी जयश्री बंशी अली मोरी.. [2] - श्री वंशी अली जी, वर्ष महोत्सव, बसंत की पोस्ट (15)