बिहारी लाल बाँकरे जू अनोखे

Vinay Ke Pada — श्री किशोरी अलि

Verse 1 of 7

बिहारी लाल बाँकरे जू अनोखे। करत नये-नये ख्याल कौतुकी, भूलि रहे काऊ धोखे ?॥ [1] नाना रंग दरसाइ विपिन में, सब ही रस दै पोखे। अब क्यों जारति बिरह जरनि बलि, किशोरी, रूप रस तोखे॥ [2] - श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (50) अनोखे हैं बिहारी लाल बांकरे. नये-नये विचारों से मोहित होकर तुम कौन-से धोखे भूल गये हो?... [1] भिन्न-भिन्न रंग देखकर विपिन पुरुष सबको आनंदित करते हैं। अब बालकों में विरह क्यों है किशोरी, रूप रस तोखे.. [2] - श्री किशोरी अली जी, विनय के पद (50)
बिहारी लाल बाँकरे जू अनोखे