बिहारी लाल बाँकरे जू अनोखे

Vinay Ke Pada — श्री किशोरी अलि

Verse 2 of 7

हे वृन्दाटवि मोहि अपनैयै। तुम ही विजैरूप राधे कौ, और कौन कौं बिनै सुनैयै॥ [1] जननी सम औगुन तजि सिसु कौं, करुणा करि निज गोद बसैयै। तुम बिन अली किशोरी क्यौं हू, और ठाँह सुख नाहिंन पैयै॥ [2] - श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (24) हे वृंदातवी, मेरा प्रेम स्वीकार करो। तू विजयी है राधे, ऐसा कौन है जो मेरी बात नहीं मानता.. [1] जो माँ है, जो माँ है, जो मेरी माँ है, उस पर दया करो मेरे प्रभु। अली किशोरी के बिना क्यों हो, यदि सुख कहीं और नहीं मिलता.. [2] - श्री किशोरी अली जी, विनय पद (24)
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