बिहारी लाल बाँकरे जू अनोखे
Vinay Ke Pada — श्री किशोरी अलि
Verse 7 of 7
रूपरासि स्वामिनी हमारी।
अलबेली सखियनि की जीवनि, लखि जीवत प्रिय कुंजबिहारी॥ [1]
ललित ग्रीव गरबाहीं दीये, ठाड़ी गहैं नीप की डारी।
हँसि हंसि बंसी सों बतरावति, कबहुंक लेति तान रूचिकारी॥ [2]
ठकुराइनि रस रासिकेलि की, वृंदावन की संपति भारी।
पाई नवल ‘किशोरी’ गोरी, अद्भुत नैननि की उजियारी॥ [3]
- श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (4)
रूपरसी हमारी स्वामिनी है। अलबेली सखियानी की जीवनी, लखि जीवत प्रिया कुंजबिहारी..[1] ललित ग्रिव गार्भिन दिये, ठाढ़ै गेहें निप डारि। बत्रावती का पुत्र शरीर में रुचि लेकर हँसता-गाता हुआ लेटा हुआ था। [2] ठकुरानी रस रसिकेली, वृन्दावन सनपति भारी। पै नवल 'किशोरी' गोरी, अद्भुत मातृ कुल की ज्योति.. [3] - श्री किशोरी अली जी, विनय के पद (4)