अहो रसिक सुकुमारी करौ विनती कर जोरि
Vinay Kundaliyan — श्री अलबेली अलि
Verse 1 of 11
अहो कुँवरि बर लाड़िली, करुणा सिंधु अपार।
तुम बिन नहिं मेरौ कोऊ, कहूँ पुकार पुकार॥
- श्री अलबेली अलि, विनय कुंडलियाँ (4)
हे कुंवारी योद्धा, आपकी करुणा अपार है। तुम मेरे बिना नहीं हो, मैं तुम्हें बुलाऊं, मुझे बुलाओ.. - श्री अलबेली अली, विनय कुंडलियान (4)