जो क्रीड़ा वृन्दावन कीनी राधे सुंदरश्याम
Vishisht Doha — श्री रूपरसिक देवाचार्य
Verse 1 of 7
अवधादिक हरिधाम को फल वैकुंठ कहंत।
वनरज ऊपर वारिये सो वैकुंठ अनंत॥
- श्री रूपरसिक देवाचार्य, विशिष्ट दोहा (3)
अवधादिक हरिधाम को वैकुंठ का फल कहा गया है। वनराज उपवरियै सो वैकुंठ अनंत.. - श्री रूपरासिक देवाचार्य, विशेष दोहा (3)