जो क्रीड़ा वृन्दावन कीनी राधे सुंदरश्याम

Vishisht Doha — श्री रूपरसिक देवाचार्य

Verse 2 of 7

दुर्लभ या संसार में, रसभजनी रतिवान। ‘रूपरसिक’ ऐसे बहुत, नीरस रीस निवान॥ - श्री रूपरसिक देवाचार्य, विशिष्ट दोहा (62) यह संसारी पुरुष दुर्लभ है, रसभजनी रतिवन। 'रूपरासिक' बहुत ऐसा, नीरस रिस निवाण.. - श्री रूपरासिक देवाचार्य, विशेष दोहा (62)
जो क्रीड़ा वृन्दावन कीनी राधे सुंदरश्यामजो क्रीड़ा वृन्दावन कीनी राधे सुंदरश्याम