जो क्रीड़ा वृन्दावन कीनी राधे सुंदरश्याम

Vishisht Doha — श्री रूपरसिक देवाचार्य

Verse 6 of 7

श्री-वृंदावन महल सुख, है सब रस को सार। ‘रूपरसिक’ जिनको मिले, तिनपर कृपा अपार॥ - श्री रूपरसिक देवाचार्य, विशिष्ट दोहा (17) श्री-वृंदावन पैलेस: खुशी सभी खुशियों का सार है। 'रुप्रासिक', उनसे मिलने वालों पर अपार कृपा होती है.. - श्री रूपरासिक देवाचार्य, विशेष दोहा (17)
जो क्रीड़ा वृन्दावन कीनी राधे सुंदरश्यामजो क्रीड़ा वृन्दावन कीनी राधे सुंदरश्याम