लालनु तेरेई आधीन

Vitthal Vipul Vani — श्री विट्ठल विपुल देव

Verse 10 of 19

(राग सारंग) लालनु तेरेई आधीन। सुनि री सखी हो साँचि कहति हौं तू जल है ये मीन॥ [1] तेरे रस-बस स्यामसुंदर वर जाचत हैं जयौं दीन। श्री बीठल बिपुल बिनोद बिहारी होत मनावत लीन॥ [2] - श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विठ्ठल विपुल देव जू की वाणी (20) (राग सारंगा) लालनु आपके वश में है। सुनो तुम सखी साँची हो, मैं कहता हूँ तुम इन क्षणों में जल हो.. [1] तुम्हारा रस सुन्दर वर है, दिन निकट आ रहे हैं। श्री विट्ठल बिपुल बिनोद बिहारी होता मनावत लिन.. [2] - श्री विट्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की वाणी (20)
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