संविधाय दशने तृणं विभो प्रार्थये व्रजमहेन्द्रनन्दन
Vitthalnath Stotras — श्री विट्ठलनाथ (गुसाईं जी)
Verse 1 of 18
कृपयति यदि राधा बाधिता शेष बाधा किम परम विशिष्टं पुष्टिमर्यादयोर्मे।
यदि वदति च किंञ्चित स्मेर हासोऽदित श्री द्विज वर मणि पंक्त्या भुक्ति शुक्त्या तदा किम्॥
- श्री विट्ठलनाथ जी, श्री राधा चतु:श्लोकी (1)
कृपायति अग्र राधा बधिता शेष बधा किं परमं विशिष्टं पुष्टिमर्यद्योरेमे। यदि वदति च किन्निचित स्मेर हसोदित श्री द्विज वर मणि पंक्त्या भुक्ति शुक्त्या तदा किम्.. - श्री विट्ठलनाथ जी, श्री राधा चतुष्श्लोकी (1)