संविधाय दशने तृणं विभो प्रार्थये व्रजमहेन्द्रनन्दन
Vitthalnath Stotras — श्री विट्ठलनाथ (गुसाईं जी)
Verse 2 of 18
प्राणनाथ वृषभानुनन्दिनी श्रीमुखाब्जरसलोलषट्पद।
राधिकापदतले कृतस्थिति- स्त्वां भजामि रसिकेन्द्रशेखर॥
- श्री विट्ठलनाथ जी, श्री राधा चतु:श्लोकी (3)
प्राणनाथ वृषभानुनंदिनी श्रीमुखब्जरासलोलशतपदा। राधिकापादतले कृतस्थिति - स्वं भजामि रसिकेन्द्रशेखर.. - श्री विट्ठलनाथ जी, श्री राधा चतुश्लोकी (3)