श्री श्यामां मधुरस्वरां सुनयनां

Vitthalnath Stotras — श्री विट्ठलनाथ (गुसाईं जी)

Verse 10 of 18

रासक्रीड़ासमासक्तं परात्परतमं विभुम्। नौमीड्य पाद पद्मं तं अन्योऽन्यप्रेम विह्वलम्॥ - श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामीनी जी ध्यानम (5) रसक्रीड़ासमसक्त्ना परात्परात्मन् विभुम्। नौमिद्य पद पद्म तं अन्योन्यप्रेम विह्वलम्।।- श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामिनी जी ध्यानम् (5)
श्री श्यामां मधुरस्वरां सुनयनांश्री श्यामां मधुरस्वरां सुनयनां