श्री श्यामां मधुरस्वरां सुनयनां
Vitthalnath Stotras — श्री विट्ठलनाथ (गुसाईं जी)
Verse 9 of 18
गौरश्यामं कृपासाध्यं कोटिकन्दर्पसुन्दरम्।
सखीसहस्रं संसेव्यं नमामि श्रीजगद्गुरुम्॥
- श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामीनी जी ध्यानम (4)
गौरश्यामन् कृपासाध्यं कोटिकनदर्पसुन्दरम्। सखिसहस्रम् संसेव्य नमामि श्रीजगद्गुरुम्.. - श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामिनी जी ध्यानम् (4)