त्रिषणमिह भवदंघ्रिप्रणतिः

Vitthalnath Stotras — श्री विट्ठलनाथ (गुसाईं जी)

Verse 13 of 18

भूयान्मेऽभ्यव्हारस्तावक ताम्बूल चर्वित नैव। पानं करुणा कूत स्मिता वलोका मृतेनैव॥ - श्री विट्ठलनाथ जी, श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (2) भूयन्मेऽभ्यवहरस्त्वक ताम्बूल चारवित नाव। पन्न करुणा कुट स्मिता वालोका मृतेनैव.. - श्री विट्ठलनाथ जी, श्री स्वामिनीजी प्रार्थना (2)
श्री श्यामां मधुरस्वरां सुनयनांत्रिषणमिह भवदंघ्रिप्रणतिः