संविधाय दशने तृणं विभो प्रार्थये व्रजमहेन्द्रनन्दन
Vitthalnath Stotras — श्री विट्ठलनाथ (गुसाईं जी)
Verse 4 of 18
श्यामसुन्दर शिखण्डशेखर स्मेरहास्य मुरलीमनोहर।
राधिकारसिक मां कृपानिधे स्वप्रियाचरणकिङ्करं कुरुष्व॥
- श्री विट्ठलनाथ जी, श्री राधा चतु:श्लोकी (2)
श्यामसुंदर शिखंडशेखर स्मृहस्य मुरलीमनोहर। रधिखारसिक मन कृपानिधे स्वप्रियचरण राजकर्ण कुरुश्व। - श्री विट्ठलनाथ जी, श्री राधा चतुः श्लोक (2)