आगे की आगे गई अब न रुखाई देहु
Vivek Lakshan Beli — श्री चाचा हित वृंदावनदास
Verse 2 of 7
अहो कृष्ण! करुणा करौ, प्रबल बढ़यौ कलिकाल।
वृंदावन हित उर व्यथा, हरौ नंद के लाल॥
- श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (87)
हे कृष्ण! दया करो, कलिकाल को प्रबल आशीर्वाद दो। वृन्दावन के हित-वेदना, हरौ नन्द के लाल.. - श्री वृन्दावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (87)