आगे की आगे गई अब न रुखाई देहु

Vivek Lakshan Beli — श्री चाचा हित वृंदावनदास

Verse 3 of 7

जुगल भजन भींज्यौ रहै, हिये गहगह्यौ नेह। वृन्दावन हित भक्त वह, त्रिभुवन पावन ग्रेह॥ - श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (41) जुगल भजन गाया जा रहा है, हिये गाघह्यौ नेह। वृन्दावन हित भक्त वाह, त्रिभुवन पवन भवन.. - श्री वृन्दावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (41)
आगे की आगे गई अब न रुखाई देहुआगे की आगे गई अब न रुखाई देहु