आगे की आगे गई अब न रुखाई देहु
Vivek Lakshan Beli — श्री चाचा हित वृंदावनदास
Verse 7 of 7
उर नहीं खरक सनेह की, मुख नहीं राधा-श्याम।
वृन्दावन हित देह नर, तोषौ यौं बेकाम॥
- श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (25)
चेहरे पर स्नेह की झलक नहीं, राधा-श्याम की सूरत नहीं। वृन्दावन हित देह नर, तोषौ यौं बेकम.. - श्री वृन्दावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (25)