आय कुँवर ठाड़े भये नवल कुंवरि के संग
Vnshivat Madhuri — श्री माधुरी दास
Verse 3 of 12
कहों कहां लों वरनि में, वंशीवट की केलि।
वा सुख में समझे सोई, जे निज संग सहेलि॥
- श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (297)
कहूँ नीच जाति का आदमी, वंश का केली। या अपनी इच्छानुसार सोयें... - श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (297)