आय कुँवर ठाड़े भये नवल कुंवरि के संग
Vnshivat Madhuri — श्री माधुरी दास
Verse 9 of 12
(कवित्त)
श्यामा श्याम बैठे नव, फूलन की सेज पर,
अरस परस दोऊ, करत सिंगार हैं। [1]
फूलन सों बैनी गुही, शीश फूल फूलनि के,
फूल रहे फूल तन, फूलन के हार हैं॥ [2]
फूलन के रसन, दसन तन फूलन के,
नख सिख फूले मानों, फूलन के डार हैं। [3]
फूलन को भार न, सम्हारो जात काहू भांति,
प्यारी पिय फूल हूते, अति सुकुवार हैं॥ [4]
- श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (290)
(कविता) श्याम श्याम नाव में बैठे हैं, फूलन की जंजीरों से पार, अरस पारस जोड़ी, करत सिंगार है। [1] फूलन का भीतरी गुहा है, सिर फूलन है, फूलन का शरीर फूलन है, फूलन का हार है... [2] फूलन का सार है फूलन का स्वाद, फूलन का पूरा शरीर है, नख, नख, फुले, मनन फूलन का भय है। [3] फूल मत बटोरो, जात क्यों नहीं जुटाते, प्रिय फूल, बड़े प्यारे हैं.. [4] - श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (290)