आय कुँवर ठाड़े भये नवल कुंवरि के संग
Vnshivat Madhuri — श्री माधुरी दास
Verse 10 of 12
सुरझाये सुरझे नहीं, उरझ रहे यह रूप।
अरसि परसि ऐसे मिले, द्वै भे एक सरूप॥
- श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (148)
सूरज नहीं सूरज, ये रूप उभर रहे हैं। अरसी और पारसी ऐसे मिलते हैं, दोनों एक ही हैं.. - श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (148)