यदैव सच्चिद्रसरूप

Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती

Verse 119 of 124

राधादास्य लसद् वपुरनिशं राधापद-सेवी। अन्तस्तोषित राधारसिको राधावने सदा निवस॥ - श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (11.116) राधादास्य लासद् वपुर्निष्णं राधापद-सेवि। राधावन में सदैव राधारस का वास है.. - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (11.116)
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