यदैव सच्चिद्रसरूप
Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती
Verse 40 of 124
रुददपि पितृमातृ-बन्धुपुत्रादिकमपहाय निशम्य नार्हदुक्तीः।
हृदि परमकठोरतां दधानो द्रुतमवलोकय कृष्णकेलिकुञ्जम्॥
- श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (1.82)
रुदादपि पितृमात्र-बन्धुपुत्रादिकम्फे निशाम्य नरहदुक्ति। हृदि परमकथारतं दधनो द्रुतमवलोकाय कृष्णकेलिकुन्याजम्। - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (1.82)