यदैव सच्चिद्रसरूप
Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती
Verse 41 of 124
तदखिल भगवत्स्वरूप-रूपामृत रसतोऽप्यति माधुरीचूरीणम्।
कुबलय कमनीय धाम राधापदरसपूर्णबने भ्रमद् भजामः॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (1.84)
तदाखिल भगवत्स्वरूप-रूपामृत रसतोयप्यति मधुरिचूरिनाम्। कुबलै कामनाय धाम राधापदारसपूर्णबाणे भ्रमद भजाम। - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (1.84)