यदैव सच्चिद्रसरूप
Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती
Verse 7 of 124
राधारमणपदाम्बृज-मधुरिमसिन्धोरनन्तपारस्य।
अनुभवितैकः स परं वृन्दारण्यं भजेत योऽनन्यः॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.5)
राधारमणपदंब्रिज-मधुरिमासिंधोरनंतपरस्य। अनुभावितैख स पर्ण वृन्दारण्यम भजेत योइनन्याः।।- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.5)