यदैव सच्चिद्रसरूप

Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती

Verse 8 of 124

वन्दावनगुणकीर्त्तिं प्रति रसना में नरीनर्ति। परिजरिहर्त्ति न यज्‌ज्ञः सकलोपरि यद्वरीवर्त्ति॥ - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.6) वन्दवन्गुणकीर्तिन प्रति रसना नर और नारी नर्तक। परिजारिहार्ति न यज्ञः सकलोपरि यद्विवर्त्ति। - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.6)
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