यदैव सच्चिद्रसरूप

Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती

Verse 79 of 124

अपि सर्वधर्महीनः सर्वकुकर्मावलेश्च निर्माता। राधेति सिद्धमन्त्रं द्व्यक्षरमुच्चार्य किं न सिध्येयम्?॥ - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.13) अपि सभी धर्मों और सभी बुरे कर्मों की रचना है। राधेति सिद्धमन्त्रं द्वयक्षरमुच्चर्य किं न सिध्ययम्?.. - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.13)
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