यदैव सच्चिद्रसरूप
Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती
Verse 80 of 124
अतिसाहसमाचरितं विरुध्य गुरुशास्त्राविद्वद्वर्यैः।
त्वयि वृन्दावन! आप वासायेन्द्रियवशमप्यतो न हि त्यज माम्॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.14)
अतिसहसमाचारितं विर्ध्य गुरुशास्त्रविद्वद्वर्य। मेरा वृन्दावन! एपी वसयेन्द्रियवशमप्यतो न हि त्यज मम.. - श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.14)