यदैव सच्चिद्रसरूप

Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती

Verse 83 of 124

पादांगुलीय-पादांगद-नूपुररत्नरोचिषां वीचीः। राधापदाब्ज ईक्षे नखमणिचन्द्रोच्छलच्छटाच्छुरिताः॥ - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.27) पादंगुलीय-पदंगदा-नुपुररत्नरोचिषां विचिः। राधापादब्ज इक्षे नखामनिचन्द्रोच्चुरितः। - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.27)
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