यदैव सच्चिद्रसरूप

Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती

Verse 84 of 124

राधा-चरण-रणन्मणिनूपुरमूकीकृतां हरेर्मुरलीम्। विफलित-तत्तत्फुत्कृतिमखिलसखीसार्थहासिनीं स्मरत॥ - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.30) राधा-चरण-राणान्मणिनुपुरामुकिकृतं हरेर्मुरलीम्। विफलता-तत्तत्फुटकर्तिमाखिलासकिसार्थसिनेन स्मरत्.. - श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.30)
यदैव सच्चिद्रसरूपयदैव सच्चिद्रसरूप