यदैव सच्चिद्रसरूप
Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती
Verse 85 of 124
स्पर्शयदाननलोचन हृदये जिघ्रन्मुहुर्मुहुः किमपि।
राधा-सुरभि-सुशीतल-पदकमलं धाम शोभते श्यामम्॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.31)
स्पर्श्यदनानलोचन हृदय जिघ्रान्मुहुर्मुहुः किमापि। राधा-सुरभि-सुशीतला-पादकमलम् धाम शोभते श्यामम्.. - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.31)