धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी
Vrindavan Rahasy Vinoda — श्री अभयराम
Verse 20 of 20
धन धन वृन्दाविपिन पपीहा प्यारे।
और नीर कौं पीवत नाहीं, स्वाँति बून्द के पारे॥ [1]
बारहमास प्यास को पामें, जिनके हरि रखवारे।
अभयराम ये हू बड़भागी, रज में रहें विचारे॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (69)
धन धन वृन्दाविपिन पपीहा प्रिये। और जो जल नहीं पीता, स्वांति बांध के पार.. [1] जो बारहमासी प्यास बुझाता है, जिसके हरि रक्षक हैं। अभयराम, यही मेरा दुर्भाग्य है, मैं सोच में पड़ा रहूँ.. [2] - श्री अभयराम, वृन्दावन रहस्य विनोद (69)