धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी
Vrindavan Rahasy Vinoda — श्री अभयराम
Verse 7 of 20
धन धन वृन्दावन के मोर।
कुञ्जन ऊपर नृत्य करत हैं जिनको देखैं नन्द किसोर॥ [1]
जिनकी बोली लगै सुहाई कूंकैं निशदिन हरि की ओर।
अभयराम ऐहू बड़भागी इनके दरसन कीजै भोर॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (62)
धन-संपत्ति, वृन्दावन के मोर। कुंजन नाच रहे ऊपर, देखत नन्दकिशोर जिन। [1] कुनकण निषादिन हरि बोले किसकी प्रसन्नता से। अभयराम, प्रातःकाल उनके दर्शन पाकर मैं धन्य हो गया.. [2] - श्री अभयराम, वृन्दावन रहस्य विनोद (62)