धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी
Vrindavan Rahasy Vinoda — श्री अभयराम
Verse 6 of 20
धन धन वृंदावन के मैंडक प्यारे।
ठाकुर की मोरी में बैठें बोलें न्यारे न्यारे॥ [1]
महाप्रसाद को पानी पीवैं मिट गये पाप सवारे।
अभयराम ऐहू बड़भागी रज में रहैं विचारे॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (76)
धन धन वृन्दावन की प्रमुख प्रिया है। उन्होंने ठाकुर के तालाब में बैठकर कहा, 'न्यारे न्यारे'.. [1] महाप्रसाद का जल पीने से सारे घोर पाप मिट गये। अभयराम अइहु बड़भागी राजा पुरुष रहे.. [2] - श्री अभयराम, वृन्दावन रहस्य विनोद (76)