धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी
Vrindavan Rahasy Vinoda — श्री अभयराम
Verse 9 of 20
धन धन वृन्दावन के स्वान प्यारे।
गैल घाट में सोय रहत हैं, चोरन के रखवारे॥ [1]
साधु सन्त की पातर चाटैं, महाप्रसाद के पारे।
अभयराम ये हू बड़भागी, रज में रहैं बिचारे॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (77)
धन धन वृन्दावन का सावन प्रिये। गेल घाट में चोरों के पहरुए सो रहे हैं.. [1] साधु-संतों के चरण, महाप्रसाद के चरण। अभयराम, मैं बड़ा अभागा हूं, राज्य में गरीब लोग रहते हैं.. [2] - श्री अभयराम, वृन्दावन रहस्य विनोद (77)