धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी
Vrindavan Rahasy Vinoda — श्री अभयराम
Verse 10 of 20
धन धन वृंदावन के विरक्त सन्त।
प्रात होय जमुना में न्हावैं, आछे रज सेवंत॥ [1]
ब्रज वासिन के टुकड़ा पावैं, भोजन करैं एकन्त।
अभयराम ऐ तो बड़भागी, ये सन्तन के सन्त॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (82)
धन धन वृन्दावन के विरक्त संत। प्रात:काल मैं यमुना में स्नान करूँ, हे राजा के सेवक.. [1] ब्रज के भक्त, एकान्त में टुकड़े खाओ। अभयराम, तुम कितने भाग्यशाली हो, बच्चों के ये संत.. [2] - श्री अभयराम, वृन्दावन रहस्य विनोद (82)