इन्द्र-मद-मर्दन दुर्ग

Vrindavan Shataka — श्री लाल बलबीर

Verse 1 of 10

ब्रह्म सनातन शुद्ध हरि, हरन सकल जग फंद। सो वृंदावन चंद में, फँस्यो प्रेम के फंद॥ - श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (5) ब्रह्म सनातन शुद्ध हरि, हरण सकल जग निधि। तो वृन्दावन चन्द्र पुरुष है, प्रेमियों के प्रेम का झरना है.. - श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (5)
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