इन्द्र-मद-मर्दन दुर्ग
Vrindavan Shataka — श्री लाल बलबीर
Verse 2 of 10
गोरी मन भोरी अहो, श्रीराधे सुख रास।
चरन कमल बंदन करौं, पुजवौ जन की आस॥
- श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (1)
हे मेरे गोरे दिल, श्री राधे, खुशी और खुशी। चरणों में कमल बाँधूँ और गधे की पूजा करूँ.. - श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (1)