इन्द्र-मद-मर्दन दुर्ग

Vrindavan Shataka — श्री लाल बलबीर

Verse 10 of 10

जद्यपि अधम मलीन हौं, तदपि तिहारी आस। सदा कृपा करि दीजै, श्रीवनराज निवास॥ - श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (12) हालाँकि मैं आधा गंदा हूँ, फिर भी मैं गंदा हूँ। श्रीवनराज के निवास पर सदैव कृपा करें.. - श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (12)
इन्द्र-मद-मर्दन दुर्ग