इन्द्र-मद-मर्दन दुर्ग
Vrindavan Shataka — श्री लाल बलबीर
Verse 9 of 10
तीन लोक ते सरस है, वृंदावन सुख कंद।
जहँ निस दिन विहरत रहैं, श्री राधागोविंद॥
- श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (8)
वृन्दावन का सुख तीन लोक से भी मधुर है। जहां दिन भर विराजते हैं श्री राधा गोविंद.. - श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (8)