बडौ रास मंडल इहां सेवित हित हरिवंश
Vrindavan Smarana — श्री हित रूप लाल
Verse 2 of 7
ब्रह्मादिक वंदन करत, और न कोऊ समतूल।
श्रीराधा वैनी गुहन, सो प्रभु वीनै फूल॥
- श्री हित रूप लाल, श्री वृंदावन स्मरण (159)
ब्रह्मादिक भजते न कुओ समतुल। श्रीराधा वेणी गुह्न, सो प्रभु विनय फुल.. - श्री हित रूप लाल, श्री वृन्दावन स्मरण (159)