बडौ रास मंडल इहां सेवित हित हरिवंश
Vrindavan Smarana — श्री हित रूप लाल
Verse 3 of 7
हरिवंशी हरिदासी जहां, व्यास आस करि वास।
रसिक त्रिवेणी विपिन में, नित्य विहार उपास॥
- श्री हित रूप लाल, श्री वृंदावन स्मरण (41)
हरिवंशी हरिदासी जहाँ, व्यास अस करि वास। रसिक त्रिवेणी विपिन पुरुष, नित्य विहार उपास.. - श्री हित रूप लाल, श्री वृन्दावन स्मरण (41)