अंत अनंत साधन करै
Vrindavan Vas Avastha — श्री अनन्य अली
Verse 1 of 8
अंत अनंत साधन करै, भजन होइ नहिं लेश ।
स्वास्थ सौं वन में फिरे, फिरत भजन गहे केश ॥
- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.60)
अन्त में अनन्त साधन व्यय हो जाते हैं और भजन नहीं हो पाता। स्वस्थ्य सौ वन मन अग्नि, फिरत भजन गाहे बाल.. - श्री अनन्या अली, श्री अनन्या अली जी की वाणी, श्री वृन्दावन वासा राज्य (2.60)