अंत अनंत साधन करै
Vrindavan Vas Avastha — श्री अनन्य अली
Verse 2 of 8
बसतहि वृन्दाविपिन में, अंतर करै जु कोइ।
तिनकौं रिपु बड़ जानियौं, ताकौ मुख जिन जोइ॥
- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.49)
बसति वृंदाविपिन पुरुष, भेद न करे कोय। तिनकौं रिपु बड़ा जनियौं, ताको मुख जिन जोई.. - श्री अनन्या अली, वाणी श्री अनन्या अली जी, श्री वृन्दावन निवास (2.49)