अंत अनंत साधन करै
Vrindavan Vas Avastha — श्री अनन्य अली
Verse 8 of 8
तीन लोक कौ राज सुख, संपति सब परिवार।
छाँड़ि सबै बसि विपिन में, जहँ रस सिंधु अपार॥
- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.45)
जो तीन लोक का राज्य, सुख, धन और परिवार जानता है। चंडी सबै बसि विपिन पुरुष, जहां रस सिंधु अपार.. - श्री अनन्या अली, श्री अनन्या अली जी की वाणी, श्री वृन्दावन वासा राज्य (2.45)