अंत अनंत साधन करै

Vrindavan Vas Avastha — श्री अनन्य अली

Verse 7 of 8

तन मन वचन प्रतीति सौं, बसि वृन्दावन माँझ। प्रेमी रसिक अनन्य कौ, संग करौ दिन साँझ॥ - श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.105) मेरा तन, मन और वचन सच्चा है, मैं मध्य वृन्दावन में रहता हूँ। प्रेमी, रसिक, अनन्य कौन, करु संघ, दिन और शाम.. - श्री अनन्या अली, श्री अनन्या अली जी की आवाज़, श्री वृन्दावन निवास राज्य (2.105)
अंत अनंत साधन करैअंत अनंत साधन करै