वृन्दावन नीरस रसिक बनावत

Vrindavan Virudavali — श्री चरणदास

Verse 3 of 6

श्रीवृन्दावन तेरी जय होवे। हे करुणाधन रसिकन जीवन रसमय कानन जय होवे॥ [1] हे अभयंकर परम शुभंकर युगल प्रियंकर जय होवे। हृदय धरोहर परम मनोहर महामोदकर जय होवे॥ [2] परम प्रभाकर प्रेम सुधाकर रस रत्नाकर जय होवे। 'राधाचरणदास' हृदयधन जय होवे तेरी जय होवे॥ [3] - श्री राधाचरण दास, वृन्दावन विरुदावली (35) श्री वृन्दावन आपकी जय हो। हे करुणाधन रसिकन, जीवन रसमय कानन जय.. [1] हे अभयंकर परम शुभंकर युगल प्रियंकर जय। परम सुन्दर महामोदकर की जय, हृदय का खजाना.. [2] परम सुन्दर प्रभाकर, प्रेम सुधाकर, रस रत्नाकर की जय। 'राधाचरण दास' हृदयधन जय होवे तेरी जय होवे.. [3] - श्री राधाचरण दास, वृन्दावन विरुदावली (35)
वृन्दावन नीरस रसिक बनावतआपकी जय हो। आप करुणा के अनंत सागर, रसीले भक्तों की आत्मा और