रसिक अनन्य उपासिका भाव भरे रस ऐंन

Vrindavipun Vilasa — श्री किशोर दास

Verse 3 of 8

जैति जैति सब वन नृपति, श्री वृंदावन धाम। तहाँ बसत संतत सुखित, स्याम वाम अभिराम॥ - श्री किशोर दास, श्री वृंदाविपुन विलास (2) जयति जयति सब वन नृपति, श्री वृन्दावन धाम। वहां शाश्वत सुख और शांति है. - श्री किशोर दास, श्री वृंदावीपुन विलास (2)
रसिक अनन्य उपासिका भाव भरे रस ऐंनरसिक अनन्य उपासिका भाव भरे रस ऐंन