रसिक अनन्य उपासिका भाव भरे रस ऐंन
Vrindavipun Vilasa — श्री किशोर दास
Verse 8 of 8
वृंदावन की सुधि करत, बसत न बनत संजोग।
हरि माया आश्चर्यवत, करत न बनत प्रयोग॥
- श्री किशोर दास, श्री वृंदाविपुन विलास (9)
वृन्दावन की स्मृति मात्र स्वप्न बनकर नहीं रह जाती। हरि माया अद्भुत है, इसका उपयोग नहीं किया जा सकता.. - श्री किशोर दास, श्री वृंदावीपुन विलास (9)