रसिक अनन्य उपासिका भाव भरे रस ऐंन

Vrindavipun Vilasa — श्री किशोर दास

Verse 7 of 8

तिनकूँ लाड लडात निति, प्रीतम परम प्रवीन। बदन चंद चकवत लखत, रहत चरन लवलीन॥ - श्री किशोर दास, श्री वृंदाविपुन विलास (16) तिनकुन युद्ध युक्ति से लड़े, प्रीतम बड़े कुशल थे। बदन चंद चकावत लखत, रहत चरण लवलीन.. - श्री किशोर दास, श्री वृंदाविपुन विलास (16)
रसिक अनन्य उपासिका भाव भरे रस ऐंनरसिक अनन्य उपासिका भाव भरे रस ऐंन